Translate
Thursday, June 12, 2025
"हिमालय"
Wednesday, May 21, 2025
ओस
चुपचाप बूँद बूँद उतर रही है,
धरती की गोदी में सिमट सहम कर!
माँ की उँगली थामे,
रुपहले सपने सी!
पत्तों पत्तों पर रपट अटक कर।
मैदानों में ओस गीत गुनगुनाती है,
घास घास की नोंक-नोंक पर रच बस जाती है !
प्रिय मिलन को हो आतुर,
ज्यों श्रृंगार करती कोई नवेली!
ज्यों नीरव प्रेम की पहली पहली पहेली!
पर्वतों पर पलकें ओस झकपकाती है,
शीतल स्पर्श सी गिर गिर जाती है l
बर्फ़ की बर्फी, हवा सी हल्की, हर बूँद एक स्मृति!
हौले से लौटी हो घर आँगन,
ज्यों बचपन की कोई कोमल छुअन।
मरुस्थल उसे जी भर भर पुकारे है,
आँखों में उसकी प्यास के कुएं गहरे है।
नमी ठहरी रूठी सखी, लौटती भी नहीं।
ओस कविता का बस आधा अधूरा अंतरा है,
भाव कहीं नहीं, अभिव्यक्ति भी नहीं।
तटों पर बनती ओस लहरों की सहेली।
नारियल के पत्तों पर जाए झूम झूम,
बिखर बिखर जाए मदमस्त अलबेली!
जलतरंगों की कहे अनकही कई कहानी,
लाई है चतुर चुराकर चंदा से चांदनी!
शहर तो भागती भीड़ की बस सांसें भरे है,
कंक्रीट के दिल, उसके गीतों को बहरे हैं!
और किसी किसी छत पर तो,
रोज रोज बस इंतज़ार करती आंखें मूंद!
सीमेंट की नगरी सगरी, नसीब कैसे हो,
बताओ भला, उसे ओस की एक भी बूंद?
नसीब कैसे हो भला, कोई एक भी बूंद?
' सरोज '
Saturday, May 11, 2024
लड़खड़ाते से कदम
Monday, November 6, 2023
मुस्कुराहटें
मुस्कुराहटें
दर्द
का
दरिया
गुजरे
वक्त
हुआ,
मुस्कुराहटों
पर
सायों
की
अभी
कमी
न
थी।
बक्श
भी
दो
इनको,
कहीं
ये
ही
ना
कह
बैठे,
करने
वालों
ने
कभी
इनायत
की
ही
नहीं।
दर्द
का
दरिया
गुजरे
वक्त
हुआ,
जो
मुस्कुराहटें
अब
भी
खिली
सी
हुई,
इनको
मत
देखो
अचरज
से,
ये
तो
हैं,
दर्द
की
निशानी,
किस्मत
की
लिखी
हुई।
बक्श
भी
दो
इनको
अब
तो
अगर,
हर
किस्से
का
दर्द
, हां , संजोकर,
सहज
नहीं, पलके
भर
भर
भिगो
कर,
बमुश्किल
सही ,पाई
है
अपने
दम
पर
सरोज
Thursday, October 26, 2023
हम पापा की परियां , हमें तो नई करवाचौथ मनानी !
हम पापा की परियां , हमें तो नई करवाचौथ मनानी !
छोड़ो कल की बातें , कल की बात पुरानी,
नए दौर में करवा चौथ, अब के नई मनानी ,
हम पापा की परियां, हैं तो लिखी पढ़ी जनानी!
लगा लो नौकर चाकर, हुई हम तो घरों की रानी!
श्रृंगार और शान का दिवस, ये तो है सालाना,
इसे पूरे मन से इस बार तो, कुछ नया है निभाना,
निर्जला ना सही बसकी , व्रत तो रख ही जाना ,
निभ जाए जितना उतना ही, होता है बस निभाना।
ताने तेरे तरकश में थे बहुत , पुराने ओ जमाने ,
तेरे चलाने से ही क्या, चलते हम सब जाते,
तूझे पता क्या? आते है, तुमको तो मुंह पिचकाने!
परवाह करते रहें तेरी ही, चाहे बस तू माने!
बदल गया जमाना, सवाल खुद पर उठाना जी,
जमाने को बद अब भी करते, कुछ मुठ्ठी भर ही,
अपना कौन किसे बेगाना, तुम जो किया करते हो !
अपनी जुबां की गुलामी, जी भर भर किया करते हो !
बेटियों के हक की बातें, ना तुम्हारे बस की हो ,
मेरी मेरी कह अहंकार, बस पिया करते हो !
अपनो के लिए ,ले राय, है किया जाता जो,
निभाएं सदा संग जाय हम, आता कुछ और तुमको?
रुलाने के बहाने तुम ढूंढो , चाहे कितने गिन भी,
हम तो जीने की खुशियां , खुद बना तो लेंगें ही,
कर पुराने जमाने हमको, कर ले अकेला कितना भी!
जंगल में मंगल खुद आप , हम तो सजा लेंगें ही !
मर मर के बांधे हो घर को , तुम पक्की डोर हो !
तो सुनो बहन बेटी बहु , सारी मम्मियां जो हो !
मान-सिंदूर-संग मांग को, अबकी जी भर सजाओ!
अबके कुछ निराला ही व्रत, तुम कर जाओ!
नारी नर को जन्म दे, नर से पिछड़ी जाती क्यों,
पालना दोनो को था समान, तुम वो कर जाती जो,
बताओ आधी दुनियां, बात समझ ना पाती तो,
आधी दुनिया खुद पर यो, इतना इतराती क्यों ?
अजी निराला करवा अब के, तुमको नया सजाना!
अब के बरस तुम करवाचौथ, अजी ऐसे निभाना,
तुम्हारे जीने के जो मायने हैं, अजी खूब ही समझाना,
आधे दिन उपवास अबके , पति देव से भी करवाना!
“सरोज”
Tuesday, October 24, 2023
Ravana's Lanka
Ravana’s Lanka
Ravana’s Lanka, by
his pride consumed,
By lustful fire to
ashes soon was bloomed.
His wicked deeds had
earned a bitter fate,
And Sita’s abduction
sealed his gloomy state.
For he, a man of
power and might,
Deemed Sita weak,
and challenged Heaven’s light.
But she, a goddess
pure and strong, defied,
His every move, his
every wicked stride.
So every year, in
Ramlila’s embrace,
We burn Lanka, to
wipe his evil trace.
A symbol of the
downfall of the proud,
Of how the wicked
always will be bowed.
But Ravana’s Lanka
was not just a place,
It was a mirror of
his inner disgrace.
His arrogance, his
lust, and his disdain,
All burned within,
and consumed his domain.
“Saroj”
Sunday, October 22, 2023
ऐ भारत! तूझे कोटि कोटि प्रणाम !
ऐ भारत! तूझे कोटि कोटि प्रणाम !
ऐ भारत! तूझे कोटि कोटि प्रणाम
रहे गौरव गाथा का सदा जग में प्रमाण,
अंतरिक्ष में तेरा अब तो परचम लहराता,
सूर्य तारों से नयन , अदा से है मिलाता।
उदीप्त तेरी ज्योति से, सभी तेरे अभियान
हो विशिष्ट चंद्रयान, आदित्य या समुद्रयान,
जैसे अंतरिक्ष मिशन सफल, होंगें शेष भी,
सीमा नहीं तेरे अतुलनीय ज्ञान विशेष की।
2008 की चंद्रयान1 उड़ान हुआ सिद्ध मील का पत्थर,
पानी खोजें वहां , 312 दिन चंद्र की परिक्रमा कर कर,
पहला चंद्र मिशन गौरवशाली इतिहास है रचे,
अन्य अभूतपूर्व खोजों से भी, हमें अनुग्रहित करे।
2019 में चंद्रयान-2 भी सपनो सी उड़ान भरे,
चला रोवर लैंडर उतारने चंद्रमा के आलिंगन में,
ना पूर्ण सफल हुआ किन्तु लैंडर रोवर तैनाती में,
पर अब भी ऑर्बिटर की सफलता थी हमारे हाथ में ।
जून 2023, चंद्रयान-3 भी सफल उड़ान भरें,
सॉफ्ट लैंडिंग कर चंद्र चुम्बन से इतिहास रचे,
इस मिशन से इसरो सिखाए, हम कुछ भी कर दिखाए,
असम्भव नहीं,भारत किसी भी मुकाम को छू जाए।
2023 जुलाई एक, आदित्य की पहली उड़ान बनी,
सूर्य अध्ययन करना, उसकी ज्वलंत योजना थी ।
सटीक उपकरणों से, प्रत्येक किरण का विश्लेषण करता है,
क्रोमोस्फीयर,फोटोस्फियर पर डेटा उजागर करेगा ,करता है।
2023 की 22 अक्टूबर को गगनयान आसमां छुआ,
हमारी पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान, एक सपना सच हुआ,
विज्ञान और साहस की हुए फिर एक और नई जीत,
आओ बच्चो! तुम भी बनो,
स्पेस एक्सप्लोरेशन के मीत।
2025 में लो फिर समुद्रयान भी तो जाएगा,
गहरे समुद्र में, खोजने गहरे ज्ञान डुबकी लगाएगा,
यह मिशन हमें ग्रह की अनंत संभावनाएं दिखाएगा,
भारत हमारा, विश्व विजयी फिर से ही कहलाएगा !
“सरोज”
Thursday, October 19, 2023
निमंत्रण है आपको , अगर स्वीकार हैं
निमंत्रण है आपको , अगर स्वीकार
हैं
चलिए कुछ अच्छा कह जाएं,
चलिए कुछ अच्छा सुन जाएं,
चलिए कुछ अच्छा कर जाएं,
पैसों से दूर, इक जहां सजाएं,
इस जीवन की तंग गलियां सी क्यों है,
ख्वाहिशों पर ख्वाहिशें, बड़ी सी क्यों हैं,
ये दिल फिर भी सुकून का तलबगार हैं,
इसे भी तो ,रोज ही खुशी की दरकार हैं,
ये एहसासों का तराना है,
भीग जाए जिसमे मन ,
वही तो गुनगुनाना है,
आप कदम तो बढ़ाइए,
हर मोड़ पर नया फसाना है,
अपने हिस्से का कुछ मीठा ढूंढ लाते हैं,
कुछ बड़ियां सा हम भी परोस जाते हैं,
रंग कुछ कुछ अपना ऐसे छोड़ जाते हैं,
चलो मिलकर , रंग इंद्रधनुषी सजाते हैं !
“सरोज”
Tuesday, October 17, 2023
Silence
Silence
When your silence speaks,
Your words fly with wings,
And reflecting your soul they sing,
Your thoughts resonate with wind,
And they soar high, glide through
the air.
For untold symphonies, just to
share.
"Saroj"
Friday, October 13, 2023
बादल आज तुम जम के बरसो!
"बादल आज तुम जम के बरसो"
बादल आज तुम जम के बरसो,
धरा की प्यास बुझाने बरसो,
तुम इसको अमृत से भर दो,
धरती को फिर पावन कर दो।
पहाड़ों
पर तुम घिर घिर आओ,
फट बह बह झरने बन जाओ,
तालाब तलहटी तर कर जाओ ,
कण कण में जीवन ज्योत जगाओ।
मैदानों पर उमड़
घुमड़ मचाओ,
जाकर सूरज की तपिश हटाओ,
खेतों में जीवन बन लहलाओ,
पशु पक्षी आनंदित कर आओ।
जलते , जंगली
आग बुझाओ,
सूखे वनों को प्राण लौटाओ,
सब प्यासे भटकते जाओ जाओ,
नव जीवन की लहर दौड़ाओ
मरू भूमि की तड़पन मिटाओ,
उसमे जाकर धड़कन सजाओ,
उसकी सूखी झोली भर आओ,
बन हरियाली वहां बस जाओ।
पहाड़ी
ढलानें धाराओं से धोकर,
मैदानी हवाओं
की आर्द्रता भिगोकर,
वनों की पत्तियों में टपक खनक कर,
रेगिस्तानी
सपनो में सिमट लिपट
कर।
बादल आज तुम जम के बरसो,
धरा की प्यास बुझाने बरसो,
तुम इसको अमृत से भर दो,
धरती को फिर पावन कर दो।
"सरोज"